NABARD/RBI Grade B Preparation: बैंकिंग और रेगुलेटरी बॉडीज के क्षेत्र में RBI Grade B और NABARD Grade A/B की परीक्षाओं को देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन सफलता की दर बेहद कम रहती है। अक्सर यह माना जाता है कि इन परीक्षाओं को निकालने के लिए महंगी कोचिंग और दिल्ली या हैदराबाद जैसे शहरों के कोचिंग हब में जाना अनिवार्य है। हालांकि, हालिया ट्रेंड्स और सफल उम्मीदवारों के डेटा को देखें तो एक नई तस्वीर सामने आती है। सही रणनीति, सटीक संसाधनों का चयन और अनुशासित सेल्फ-स्टडी के दम पर पहले ही प्रयास में इन परीक्षाओं को क्रैक करना न केवल मुमकिन है, बल्कि कई मायनों में यह अधिक प्रभावी भी साबित हो रहा है।
Quick Highlights: NABARD/RBI Grade B Preparation

| मुख्य बिंदु | विवरण |
| परीक्षा का स्वरूप | तीन चरण (Phase 1, Phase 2 और Interview) |
| 핵심 (कोर) विषय | ESI (Economic & Social Issues), ARD (NABARD के लिए), Finance & Management (RBI के लिए) |
| करेंट अफेयर्स का महत्व | पिछले 6-8 महीनों का डेटा और सरकारी योजनाएं (Government Schemes) निर्णायक |
| सेल्फ-स्टडी का आधार | NCERTs, मानक समाचार पत्र (The Hindu/Livemint), और सरकारी रिपोर्ट्स (PIB/Budget) |
| सफलता की कुंजी | डिस्क्रिप्टिव राइटिंग प्रैक्टिस और मॉक टेस्ट का नियमित विश्लेषण |
परीक्षा के स्ट्रक्चर को समझना: पहली सीढ़ी
किसी भी बड़ी जंग को जीतने के लिए मैदान की समझ होना जरूरी है। RBI और NABARD दोनों ही परीक्षाओं का पैटर्न लगभग समान है, लेकिन इनके ‘Focus Areas’ अलग हैं।
Phase 1 मुख्य रूप से आपकी स्पीड और एक्यूरेसी का टेस्ट है। यहाँ Quant, Reasoning, English के अलावा General Awareness (GA) सबसे बड़ा गेम-चेंजर होता है। अक्सर छात्र Quant और Reasoning में उलझ जाते हैं, जबकि असल कट-ऑफ GA और English से तय होती है।
Phase 2 आपकी वैचारिक स्पष्टता (Conceptual Clarity) और लेखन क्षमता का परीक्षण करता है। यहाँ ऑब्जेक्टिव के साथ-साथ डिस्क्रिप्टिव पेपर भी होता है। बिना कोचिंग के तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यही वह चरण है जहाँ उन्हें सबसे ज्यादा मेहनत करने की जरूरत होती है।
संसाधनों का सही चयन: क्या पढ़ें और क्या छोड़ें?
कोचिंग संस्थान अक्सर नोट्स का अंबार लगा देते हैं, जिससे छात्र ‘Information Overload’ का शिकार हो जाते हैं। सेल्फ-स्टडी में आपका फोकस ‘Minimum Resources, Maximum Revision’ पर होना चाहिए।
1. Economic and Social Issues (ESI)
यह विषय दोनों परीक्षाओं के लिए कॉमन है। इसके लिए किसी भारी-भरकम किताब के बजाय बेसिक कॉन्सेप्ट्स के लिए Mrunal Patel के वीडियो या Ramesh Singh की किताब के चुनिंदा चैप्टर्स देखे जा सकते हैं।
- Static Part: बजट, इन्फ्लेशन, बैंकिंग सिस्टम और सोशल स्ट्रक्चर।
- Dynamic Part: सरकार की नई योजनाएं (जैसे PM-Kisan, Gati Shakti) और रिपोर्ट्स (NFHS, SECC)।
2. Agriculture and Rural Development (ARD) – केवल NABARD के लिए
ग्रामीण विकास और कृषि से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए RK Sharma की ‘Agriculture at a Glance’ या ICAR की वेबसाइट का सहारा लिया जा सकता है। यहाँ स्टेटिक डेटा से ज्यादा करंट ट्रेंड्स पर ध्यान देना जरूरी है।
3. Finance and Management (FM) – केवल RBI के लिए
फाइनेंस के लिए Prasanna Chandra की किताब बेसिक समझने के लिए अच्छी है, लेकिन RBI की वेबसाइट पर मौजूद ‘FAQs’ और ‘Circulars’ सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं। मैनेजमेंट के लिए लीडरशिप और मोटिवेशनल थ्योरीज पर पकड़ बनाना आवश्यक है।
न्यूज़पेपर और PIB: आपकी तैयारी की रीढ़
बिना कोचिंग के तैयारी करने वालों के लिए Press Information Bureau (PIB) किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार की हर छोटी-बड़ी घोषणा, नीति और डेटा सबसे पहले यहीं अपडेट होता है।
- नोट्स बनाने की कला: समाचार पत्र पढ़ते समय केवल हेडलाइन न देखें। अगर ‘RBI ने रेपो रेट बढ़ाया’ ऐसी खबर है, तो उसके पीछे के ‘Economic Implication’ को समझें। यही समझ आपको डिस्क्रिप्टिव उत्तर लिखने में मदद करेगी।
- संपादकीय (Editorials): ‘The Hindu’ या ‘Business Standard’ के एडिटोरियल पढ़ने से आपकी शब्दावली और मुद्दों को देखने का नजरिया बेहतर होता है।
डिस्क्रिप्टिव राइटिंग: जहाँ अधिकतर छात्र पिछड़ते हैं
कोचिंग का सबसे बड़ा तर्क यह होता है कि वे आपके उत्तर चेक करते हैं। लेकिन आप इसे खुद भी मैनेज कर सकते हैं।
- Typing Speed: चूंकि परीक्षा ऑनलाइन होती है, इसलिए कीबोर्ड पर टाइपिंग की प्रैक्टिस अनिवार्य है।
- Structure of Answer: अपने उत्तर को हमेशा प्रस्तावना (Introduction), मुख्य भाग (Body) और निष्कर्ष (Conclusion) में बांटें।
- Data Integration: अपने दावों को पुख्ता करने के लिए हालिया रिपोर्ट्स या इंडेक्स (जैसे Hunger Index, GDP Estimates) का जिक्र जरूर करें।
विश्लेषण: आखिर सेल्फ-स्टडी क्यों बेहतर है?
आज के डिजिटल युग में जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि जानकारी को फिल्टर करने की चुनौती है। कोचिंग संस्थान अक्सर एक ही सांचे (Template) में सबको ढालने की कोशिश करते हैं, जिससे उम्मीदवारों की मौलिकता (Originality) खत्म हो जाती है।
सेल्फ-स्टडी करने वाला छात्र जब खुद रिसर्च करता है, तो उसे विषय की ‘In-depth’ समझ होती है। वह केवल रटता नहीं है, बल्कि सिस्टम के काम करने के तरीके को समझता है। इंटरव्यू के दौरान यही मौलिक सोच आपको अन्य उम्मीदवारों से अलग खड़ा करती है।
सुरेंद्र का नज़रिया: डेटा और भविष्य की राह
इन परीक्षाओं के पिछले पांच वर्षों के परिणामों का विश्लेषण करें तो एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आता है। टॉप 100 में आने वाले लगभग 40% छात्र अब ऐसे हैं जिन्होंने किसी फुल-टाइम कोचिंग के बजाय ‘Targeted Self-study’ और ‘Online Resources’ का सहारा लिया।
डेटा क्या कहता है?
RBI Grade B 2024 के ट्रेंड्स बताते हैं कि परीक्षा अब ‘Static’ से पूरी तरह ‘Analytical’ हो चुकी है। अब प्रश्न यह नहीं पूछा जाता कि ‘रेपो रेट क्या है’, बल्कि यह पूछा जाता है कि ‘बदलते वैश्विक परिदृश्य में रेपो रेट का भारतीय एमएसएमई सेक्टर पर क्या प्रभाव पड़ेगा’। इस तरह के सवालों के जवाब कोई कोचिंग रटा नहीं सकती; इसके लिए आपको खुद आर्थिक खबरों से जुड़ना होगा।
भविष्य की संभावना:
आने वाले समय में कंपटीशन और बढ़ेगा, लेकिन परीक्षा का स्तर भी और अधिक तार्किक होगा। जो छात्र केवल नोट्स पर निर्भर हैं, उनके लिए राह कठिन होगी। मेरी सलाह यह है कि आप अपनी तैयारी को ‘Data-Driven’ बनाएं। पिछले साल के पेपर्स (PYQs) का बारीकी से अध्ययन करें और देखें कि कौन से टॉपिक्स बार-बार रिपीट हो रहे हैं।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है, लेकिन एक स्मार्ट रास्ता जरूर है। अगर आप दिन के 7-8 घंटे पूरी ईमानदारी से बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के दे सकते हैं, तो आपको किसी महंगे कोचिंग क्लास की जरूरत नहीं है। आपकी सबसे बड़ी स्ट्रेंथ आपकी ‘Curiosity’ और ‘Consistency’ होनी चाहिए।